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बिहार में अब किसानों की बल्‍ले - बल्‍ले

बिहार में किसानों को खेती के नये-नये तकनीकी गुर सिखाने के लिए सरकार राज्‍य में तीन सौ किसान पाठशालाएं खोलेगी. बिहार क़षि प्रबंधन व प्रसार-प्रशिक्षण संस्‍थान के निदेशक डॉ आरके सोहाने ने इस बारे में जानकारी दी. उन्‍होंने बताया कि इन पाठशालाओं में क़षि विशेषज्ञ किसानों को खेती के तरीके बतायेंगे. किसानों को यह बताया जायेगा कि किस मौसम में किस फसल की खेती लाभदायक हो सकती है. उन्‍होंने बताया कि किसानों को यह जानकारी प्रत्‍येक सप्‍ताह दी जायेगी. यह पाठशाला किसानों के घर में ही खोली जायेगी. इसके लिए उस किसान के पास 2.50 एकड जमीन का होना अनिवार्य है. उन्‍होंने बताया‍ कि क़षि विभाग की ओर से किसानों को राज्‍य के बाहर भी भेजे जाने की योजना तैयार की गयी है. उन्‍होंने कहा कि पाठशाला में किसानों को धान की प्रजातियों का चयन, बिचडा डालने आदि के बारे में भी बताया जायेगा. किसानों को खाद के उपयोग संबंधित जानकारी के साथ मौसम के सदुपयोग की भी जानकारी दी जायेगी.

जड़ों की ओर लौटते नयी पीढी के युवा किसान

चुस्‍त कपड़े, हाथ में लैपटॉप, जेब में महंगे से महंगा मोबाईल. यह पहचान है नयी पीढी के कुछ युवा किसानों की, जो अपनी जड़ों की लौटने का मन बना चुके हैं. बेशक, देश के कई क्षेत्रों किसान आज जल्द पैसा कमाने की होड़ में अपनी उपजाऊ भूमि को बेच रहे हों, परंतु नई पीढ़ी के कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने पुश्तैनी व्यवसाय खेती को समाप्‍त होते देखना कतई नहीं चाहते. नई पीढ़ी के ये युवा किसान आधुनिक भले हों पर तेज गर्मी के मौसम में भी अपनी फसल की देख-रेख के लिए पसीना बहाने से पीछे नहीं हटते। आज पंजाब में एक ‘किल्ला’ (एकड़) जमीन की कीमत भले ही 50 लाख से 5 करोड़ रुपये हो, परंतु अनेक पढ़े-लिखे डिग्रीधारी युवा अपनी जमीन पर जोरों-शोरों से खेती शुरू कर चुके हैं।पांच वर्ष पहले न्यूजीलैंड जाकर वहां के स्थाई नागरिक बनने के बाद वापस लौट आए कुल्तार सिंह ने अपने भाई हरजोध सिंह के साथ खेती-बाड़ी के अतिरिक्त एक ‘विवाह पैलेस’ की भी स्थापना की है। पुणे के सिम्बॉयसिस से कर्मचारी प्रबंधन में स्नातकोत्तर कुल्तार सिंह का कहना है कि, "खेती हमारा पुश्तैनी पेशा है और हम इसे नहीं छोड़ेंगे। दरअसल खेती से जुड़ी समस्याओं और बि...