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चूहा खाना हो तो बिहार जाएं

संजय पाण्‍डेय
कभी लालू प्रसाद ने चरवाहों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के लिए ‘चरवाहा विद्यालय’ की परिकल्पना को हकीकत में तब्दील कर नायाब समाज शास्त्रीय हस्तक्षेप किया था, अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बारी है। उनकी सरकार ने राज्य की अति गरीब “मुसहर जाति” के उत्थान के लिए चूहे के मांस का बाजारीकरण करने का फैसला किया है।
जल्द ही राज्य के होटलों में लजीज व्यंजनों की सूची में चूहे से बने व्यंजन भी शामिल हो जाएंगे। इसके पीछे इस जाति के सामाजिक-आर्थिक उत्थान का उद्देश्य छिपा है। राज्य के शहरी इलाकों में चूहे का मांस को भोजन में शामिल कराए जाने का प्रयास तेज किया जाएगा। मुसहर जाति के लोगों के लिए चूहा पसंदीदा आहार है। चूहा पकड़ने में इस जाति की होशियारी जगजाहिर है।राज्य समाज कल्याण मंत्रालय के प्रधान सचिव विजय प्रकाश ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “हम मुसहर जाति के लोगों को मुर्गी पालन की तर्ज पर चूहा पालन के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसके लिए इस जाति के लोगों को सरकार की ओर से आर्थिक मदद दी जाएगी। इससे इस जाति को नियमित आमदनी होगी। पालतू चूहों का मांस होटलों व शहरी इलाकों में खपाया जाएगा”। प्रकाश का दावा है कि चूहे का मांस मुर्गे से भी अधिक जायकेदार होता है और पौष्टिकता के मामले में भी यह आगे है। राज्य में इस जाति के लोगों की संख्या करीब 23 लाख है और उन्हें सर्वाधिक पिछले व शिक्षा की रोशनी से वंचित तबकों में शुमार किया जाता है। उनका तो यह भी दावा है कि राज्य के मोकामा और दानापुर जैसे इलाकों में इस व्यंजन के शौकीनों की तादाद बढ़ रही है।

Comments

PREETI BARTHWAL said…
चुहों को भी नही बख्शा हे राम!

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