Skip to main content

शुभांगी की तमन्ना, शाहरुख खान बनना

हम बचपन से 'अलादीन और उसकी जादुर्इ चिराग की कहानी सुन-सुनकर बड़े हुए हैं। आप भले ही यकीन न करें, लेकिन सच है कि हममें से हरेक ने कभी-न-कभी अपनी तीन इच्छाओं की पूर्ति के लिए उस जादुर्इ चिराग को हासिल करने की तमन्ना जरूर की है।
हाल में ऐसा ही एक दृश्य सब टीवी के 'चिडि़या घर शो पर फिल्माया गया, जिसमें मेंढक को एक चिराग मिलता है, जिसे घिसने पर एक जिन्न प्रगट होता है, जो बिल्कुल गधा प्रसाद जैसा लगता है। इस दृश्य को फिल्माते समय हर कोर्इ जिन्न के उपसिथत होने और अपनी-अपनी इच्छाएँ पूरी करने के रोमांच से भर गया।
जब अधिकतर कलाकार अपनी-अपनी इच्छाओं की चर्चा कर रहे थे तो उसी बीच हमारा ध्यान कोयल (शुभांगी अत्रे पुरी अभिनीत) की तीन इच्छाओं की ओर गया। शाहरुख खान की जबर्दस्त फैन, शुभांगी की पहली इच्छा स्त्री शाहरुख खान बनकर इस दशक में लाखों लोगों के दिलों पर राज करने की थी। इतना ही नहीं, उसकी दूसरी इच्छा अपनी बेटी को, जो उसकी तरह अभिनय की शौकीन नहीं है, अभिनेत्री के रूप में अपने बाद सुपरस्टार की हैसियत हासिल करते हुए देखने की थी। इन दो इच्छाओं की पूर्ति के बाद तीसरी इच्छा किसी हो सकती है, इस पर ज्यादा कहने की जरूरत नहीं!
इस 'स्त्री शाहरुख खान को देखें चिडि़या घर में, प्रत्येक सोमवार से शुक्रवार रात के 9:00 बजे, केवल सब टीवी पर!!!

Comments

Popular posts from this blog

क्‍या अदाकारी है, आप भी देंखे

आज सुबह मेरे मेल पर मेर‍े एक दोस्‍त ने एक तस्‍वीर भेजी, जो आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूं, यह तस्‍वीर उन्‍होंने खुद बनाई है. आप सभी देखने वाले से निवेदन है कि आप इस तस्‍वीर पर अपनी टिप्‍पणी जरूर भेंजे इससे उस कलाकार का हौंसला बढेगा. धन्‍यवाद

हमसे कुछ नहीं होगा हम गुलाम पत्रकार हैं

अभिषेक पोद्दार हमेशा की तरह कल रात अपने अखबार के कार्यालय से काम निपटाकर अपने घर गया, जहां हम सभी रूममेट बैठकर रोज की तरह किसी मुद्दे पर बहस कर रहे थे, अचानक मैंने अपने एक साथी से पूछा यार फ्रीलांस रिपोर्टर को हिंदी में क्‍या कहेंगे उसने कहां स्‍वतंत्र पत्रकार, तभी तपाक से मेरे मुंह से निकल गया तो हम गुलाम पत्रकार हैं. उसने भी भरे मन से हामी भर दी. फिर क्‍या था हमसब इसी मुद्दे पर चर्चा करने लगे. दो दिनों पहले बोलहल्‍ला पर पत्रकारिता के बारे में मैंने जो भडास निकाली थी उसका कारण समझ में आने लगा. आज हकीकत तो यह है कि हम जिस मीडिया घराने से जुड जाते हैं उसके लिए एक गुलाम की भांति काम करने लगते हैं, हम अपनी सोच, अपने विचार और अपनी जिम्‍मेवारियों को उस मीडिया घराने के पास गिरवी रख देते हैं और सामने वाला व्‍यक्ति हमें रोबोट की तरह इस्‍तेमाल करने लगता है, हम उसकी धुन पर कठपुतलियों की तरह नाचना शुरू कर देते हैं. किसी को जलकर मरते देखकर हमारा दिल नहीं पसीजता, किसी की समस्‍याओं में हमें अपनी टॉप स्‍टोरी व ब्रे‍किंग न्‍यूज नजर आती है, सच कहें तो शायद हमारी संवेदना ही मर चुकी हैं. शायद आज पूरी की...

फिर फंसी मेरठ में दूसरी गुडिया

चौदह साल के बाद लौट आने वाले आबिद की अपनी बीवी शबाना को पाने की जद्दोजहद अब दोनों पक्षों की पंचायतों में उलझ गई है। जहां कुलंजन गांव की पंचायत इस मामले को लेकर पूरी तरह आबिद के पक्ष में खड़ी है, वहीं लावड़ की पंचायत ने ऐलान कर दिया है कि शबाना को किसी भी हाल में आबिद को नहीं सौंपा जाएगा। इस मामले में एक गंभीर मोड़ आबिद की सास अकबरी के हालिया बयान के बाद आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आबिद ने शबाना का न केवल शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया बल्कि उसे गलत धंधे में भी धकेलने की कोशिश की। अकबरी का कहना है कि आबिद के ज़ुल्म से तंग आकर शबाना अपने बच्चे को लेकर मायके आ गई थी लेकिन आबिद उसके पीछे पीछे चला आया और उसने गांव के लोगों के सामने ही शबाना को पीटा। गांव वालों के विरोध करने पर आबिद ने शबाना को तलाक दे दिया। इसके बाद कई सालों के लिए वह गायब हो गया। अकबरी ने कहा कि चूंकि आबिद शबाना को तलाक देने के बाद लापता हुआ था इसलिए इद्दत की रस्म के बाद छह साल पहले शबाना का निकाह मुज़फ्फरपुर के खालापार निवासी अबरार से कर दिया गया। आबिद के लौट आने के बाद अकबरी के गांव की पंचायत में शबाना के दूसरे ...