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नहीं बन सके एक-दूजे के लिए

कहते हैं कि शादी के लिए जोडी भगवान ही बनाकर इस धरती पर भेजता है, सभी इसे सच भी मानते हैं और कहते भी है कि अगर किसी की शादी किसी से न हो पाई और अगर किसी से हो गई तो भाई हम क्‍या कर सकते हैं यह सब तो उस भगवान का किया खेल है. परंतु ईश्‍वर ने रांची के रहने वाले मलयेश के लिए कुछ अजब ही खेल खेला. मलयेश जो रांची का रहनेवाला था और फिलहाल मुंबई में रिलांयस कंपनी में साफटवेयर इंजीनियर के पोस्‍ट पर कार्यरत था. उसकी शादी 6 दिसंबर को होने वाली थी. वह भी उससे नहीं जिसे ईश्‍वर ने उसके लिए बनाया था बल्कि उससे जिससे उसने प्‍यार किया था और प्‍यार भी कोई ऐसा वैसा नहीं उसकी दिवानगी ऐसी थी कि उसने अपनी शादी के लिए अपनी एक वेबसाइट भी बना रखी थी जिसपर उसे जानने वाले या उसे चाहने वाले उसे शुभकामनाएं दे सके और उन दोनों के जिंदगी की हर बात जान सके मसलन कैसे उनकी मुलाकात हुई कैसे वह एक दूसरे के करीब आये और कैसे प्‍यार हुआ. यहां यह बता दूं कि मलयेश खडगपुर से आईआईटी करने के बाद जैन इंस्‍टीटच्‍यूट से एमबीए किया. आईआईटी करने के दौरान ही उसकी नजर खुशबू नाम की एक लडकी पर पडी और उनदोनों के बीच पहले तो दोस्‍ती हुई और फि...

हमले हो गये यार सोने दो

बुधवार की शाम मैच देख रहा था, मैच खत्‍म हो गया था मैन ऑफ द मैच का पुरस्‍कार भी वीरू को मिल चुका था तभी स्‍पेशल रिपोर्ट के लिए समाचार चैनल लगाया वहां कपिल देव अपनी बात कह ही रहे थे कि अचानक मुंबई से एक बडी खबर आई कि मुंबई में फायरिंग हो रही है. 10 लोग घायल हुए हैं. मैंने भी उसे हल्‍के से लिया, डाक एडिशन छोड चुका था अब सिटी एडिशन की तैयारी थी, सोचा देख लेते है कुछ लोग मरेंगे तो पहले पेज पर लगाने की सोचूंगा नहीं तो देश-विदेश पेज है न जिंदाबाद. यही सोचते सोचते खाना खाने चला गया. जब खाना खा कर आया तो पता चला कि 25 लोग मारे जा चुके हैं. अब क्‍या करू यह सोचने लगा क्‍योंकि आज ऑफिस में मैं ही एकलौता सीनियर आदमी था बाकी सभी छुट्रटी पर चले गये थे और कुछ एक पार्टी में चले गये थे अब कल ही वे आते. और तो और हमारे संपादक जी भी बाहर थे, जिनसे बात नहीं हो पाई. तभी दिमाग में आया कि अपने प्रबंधक को फोन लगाया जाये मैंने उन्‍हें फोन किया तो उन्‍होंने कहा कि हां पता है लोग मर रहे हैं. अब तुम जैसा चाहो कर लो देख लेना ठीक-ठाक कवरेज हो जाये. और फोन रख दिया. मैंने फिर उन्‍हें फोन किया कि सर कोई स्‍पेशल पेज दिया ...

लोकतंत्र का चौथा स्‍तंभ विज्ञापन

यह पढकर आपको लग रहा है कि इसे लिखने वाला शायद पागल हो गया है पंरतु झारखंड में बीते दिनों जिस तरह से एक घटना हुई उससे तो आपको यह पूरा विश्‍वास हो जायेगा कि लोकतंत्र का चौथा स्‍तंभ मीडिया नहीं विज्ञापन है. झारखंड की आठवीं वर्षगांठ पर राज्‍य सरकार की ओर से 15 नवंबर से 25 नवंबर तक मोरहाबादी मैदान में उधोग मेला लगाया गया था. इसके लिए पूरी तैयारियां भी की कई गई थी. कई बडी कंपनियों के स्‍टाल भी लगे लोगों की भीड भी काफी उमडी कुल मिलाकर यह मेला पूर्णत सफल रहा. परंतु इस मेले के खत्‍म होने के बाद भी एक टीस दिल में लगी रही. जब इस मेले की घोषणा के लिए राज्‍य के उपमुख्‍यमंत्री सुधीर महतो ने प्रेस कांफ्रेस की थी, जिसमें उन्‍होंने मेले के बारे मीडिया के माध्‍यम से जानकारियां दी थी. इसी क्रम में उन्‍होंने एक सवाल के जवाब में कहा था कि जो इस मेले का बेहतरीन कवरेज करेगा उसे ईनाम दिया जायेगा, वहीं जो खराब या यूं कह लें निगेटिव कवरेज करेगा उसे लाठियां मिलेगी. उन्‍होंने जब यह बातें कहीं उस समय राज्‍य के लगभग सभी प्रमुख समाचारपत्र व इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के संवाददाता मौजूद थे. जिसपर सब लोगों ने थोडा ऐतराज जता...

एक ऐसा देश जहां हर 26 सेकेंड में होता है बलात्‍कार

दक्षिण अफ्रीकी ऐक्ट्रिस और सामाजिक कार्यकर्ता शार्लीज़ थेरन का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में हर 26 सेकंड में एक महिला बलात्कार की शिकार होती है। अकैडमी अवॉर्ड विजेता थेरन का कहना है कि इस देश की स्थिति भयावह है। थेरन को संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने संयुक्त राष्ट्र का शांति दूत नियुक्त किया है। वह महिलाओं के खिलाफ हिंसा के खात्मे के लिए अभियान चलाएंगी। न्यू यॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में थेरन ने कहा कि साउथ अफ्रीका में महिलाओं की स्थिति भयावह है। हालात इतने खराब हैं कि वहां हर तीन में से एक महिला बलात्कार का शिकार बनती है। थेरन ने केपटाउन में महिलाओं के लिए एक विशेष संस्था की स्थापना की है। यह संस्था महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और उनके जीवन में सुधार लाने के लिए काम करती है।

कल का रोडपति शिक्षक अब करोड़पति बना

संजय पांण्‍डेय एक मामूली शिक्षक के बैंक खाते में 99 करोड़ रुपये एक मुश्त कहीं से आ गये। शिक्षक को इसकी जानकारी तब हुई जब वे अपने बैंक खाते से पैसा निकालने गये। बैलेंस देख उन्हें गश आ गया। कुछ देर बाद वे संयत हुए और बिना पैसा निकाले ही घर लौट गए। ऐसे में यहां एक सवाल उठ रहा है कि एक साधारण शिक्षक के खाते में एक मुश्त 99 करोड़ रुपये कहां से आये और किसने भेजे! गोरखपुर के खोराबार थाना अंतर्गत ग्राम महीमाठ निवासी बीरेन्द्र पाण्डेय नामक यह शिक्षक प्राथमिक स्कूल सनहा में तैनात हैं। शिक्षक के खाते में नौ मार्च 07 के पूर्व कुल 2500 रुपये थे। बकौल शिक्षक दस मार्च को स्टेट बैंक की इंजीनियरिंग कालेज शाखा जाने पर पता चला कि उनके खाते में एक मुश्त 99 करोड़ रुपये कही से आ गये हैं। वे सकते में आ गये और बिना रुपये निकाले घर लौट आये। सोचा कहीं उनके खिलाफ किसी ने साजिशन तो यह रकम नहीं भेजी। सो अपने सहयोगी शिक्षक गंगा शरण त्रिपाठी, प्राथमिक शिक्षक संघ के मंत्री राजेश दुबे, खोराबार के संकुल प्रभारी श्री राम गुप्त आदि को खाते में 99 करोड़ रुपये आने की जानकारी दी। शिक्षक श्री पांडेय के खाते में 99 करोड़ एक मुश्त ...

दोस्‍त मैं शादी कर रही हूं

आज फिर कई दिनों बाद मेरी बात उस दोस्‍त से हुई जिसकी कुछ कविताएं मैं आपको पहले भी पढाता आया हूं हालांकि आज भी बात के क्रम में मैंने उसका नाम इस पोस्‍ट में डालने की आज्ञा मांगी पर उसने खारिज कर दिया. खैर मुद्दे पर आता हूं आज भी जब मेरी बात हुई पहले की ही तरह हुई और हम जब भी बात करते एक गर्मजोशी से बात करते ऐसा कभी नहीं लगा कि जिससे मैं बात कर रहा हूं उससे आज तक मिला नहीं हूं आज भी बात करके लगता है कि जैसे कल ही मैं उससे मिला था और कल ही बात हुई थी. चूंकि मैं अखबार में काम करता हूं तो उसने बात की शुरूआत ही ऐसे कि की अभी एक न्‍यूज है मैंने पूछा कि क्‍या मैंने सोचा इंदौर में भी कोई हादसा हो गया क्‍या, क्‍योंकि हमें तो सिर्फ सभी जगहों पर खबर ही दिखती है पर उसने कहा दोस्‍त मैं शादी कर रही हूं, पता नहीं एक अजब सी खुशी मेरे जेहन में उतर गई जिसका आभास मुझे उससे बात करने के बाद हुआ. उसके बाद मैंने उससे पूरी कहानी पूछी जैसा सभी पूछते हैं उसने भी बडी सादगी से उसका जवाब दिया. पर जो जवाब दिया उसने मेरे दिल में एक अजब सी उलझन में डाल दिया, मैं आज तक सोचता था कि प्‍यार व्‍यार कुछ नहीं होता सिर्फ चंद दि...

डेढ़ महीने के बच्चे के पेट में बच्चा

कोलकाता के एक नर्सिन्ग होम के डॉक्टरों ने डेढ़ महीने के बच्चे के पेट से भ्रूण निकाला है। डेढ़ महीने का जुनैद आलम पेट की लगातार बढ़ती सूजन की वजह से ढंग से सांस भी नहीं ले पा रहा था। किसी को पता भी नहीं था कि उसकी इस परेशानी की वजह उसके पेट में पल रहा उसी का जुड़वां भ्रूण था। चिकित्सा जगत के इस अनोखे घटनाक्रम में जुनैद के पेट से उसके जुड़वा के भ्रूण को एक सफल ऑपरेशन के बाद बाहर निकाल दिया गया। जुनैद का ऑपरेशन करने वाले सर्जन प्रफुल्ल कुमार मिश्र ने बताया कि झारखंड निवासी आलम को 21 सितंबर को नर्सिन्ग होम में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद उसके पेट में एक बड़े ट्यूमर का पता चला। पहले डॉक्टर को लगा कि यह कैंसर का मामला हो सकता है। जुनैद के पिता की सहमति के बाद 22 सितंबर को उसका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के दौरान ही पता चला कि वह कोई ट्यूमर नहीं, बल्कि एक अविकसित भ्रूण है। डॉक्टरों ने बताया कि भ्रूण के अंदर भ्रूण के पलने की घटना कम ही देखने को मिलती है और उनमें भी एक का ज़िंदा बच जाना तो बहुत ही आश्चर्यजनक है।