Skip to main content

दोस्‍त मैं शादी कर रही हूं


आज फिर कई दिनों बाद मेरी बात उस दोस्‍त से हुई जिसकी कुछ कविताएं मैं आपको पहले भी पढाता आया हूं हालांकि आज भी बात के क्रम में मैंने उसका नाम इस पोस्‍ट में डालने की आज्ञा मांगी पर उसने खारिज कर दिया. खैर मुद्दे पर आता हूं आज भी जब मेरी बात हुई पहले की ही तरह हुई और हम जब भी बात करते एक गर्मजोशी से बात करते ऐसा कभी नहीं लगा कि जिससे मैं बात कर रहा हूं उससे आज तक मिला नहीं हूं आज भी बात करके लगता है कि जैसे कल ही मैं उससे मिला था और कल ही बात हुई थी. चूंकि मैं अखबार में काम करता हूं तो उसने बात की शुरूआत ही ऐसे कि की अभी एक न्‍यूज है मैंने पूछा कि क्‍या मैंने सोचा इंदौर में भी कोई हादसा हो गया क्‍या, क्‍योंकि हमें तो सिर्फ सभी जगहों पर खबर ही दिखती है पर उसने कहा दोस्‍त मैं शादी कर रही हूं, पता नहीं एक अजब सी खुशी मेरे जेहन में उतर गई जिसका आभास मुझे उससे बात करने के बाद हुआ. उसके बाद मैंने उससे पूरी कहानी पूछी जैसा सभी पूछते हैं उसने भी बडी सादगी से उसका जवाब दिया. पर जो जवाब दिया उसने मेरे दिल में एक अजब सी उलझन में डाल दिया, मैं आज तक सोचता था कि प्‍यार व्‍यार कुछ नहीं होता सिर्फ चंद दिनों का रिश्‍ता होता है, हालांकि मैंने भी कई जोडों को शादी में बंधते देखा है तो मेरा दिल कहता था कि चांद में भी दाग होता है यह शादी उसी का परिणाम है. और आगे जो उसने अपने प्‍यार के बारे में बताया उसे जानकर तो मैं अचंभित हो गया शायद आप भी हो जाये, पर उसने जिस विश्‍वास और भरोसे से जारी कहानी बयां की उससे मुझे भी लगने लगा कि आज जहां लोग एक दूसरे को मारने पर उतारू है, दोस्‍त दोस्‍त व भाई भाई का दुश्‍मन है उन्‍हीं इंसानों के बीच आज भी प्‍यार की ज्‍योत जल रही है. अब आपको ज्‍यादा उलझन में न डालते हुए बताता हूं कि वह शादी कर रही है एक ऐसे लडके से जिससे वह ऑर्कूट में मिली, बातें हुई प्‍यार हुआ और अब शादी करने जा रही है. आप को भी इस बात पर शायद पूरा भरोसा नहीं होगा कि ऐसा भी हो सकता है आपको हो चाहे न हो पर मुझे पूरा भरोसा तो नहीं हुआ, या हो सकता है कि मैं जिस व्‍यवसाय में हूं यह उसका परिणाम है, पर उसके भरोसे और विश्‍वास ने मुझे भी भरोसा दिला दिया कि यह सच है और ऐसा होगा. तो अब देर नहीं है उसकी शादी को और मैं चाहता हूं कि मेरे साथ आप भी उस प्‍यारी जोडी को अपना आर्शीवाद और शुभकामनाएं दें क्‍योंकि मेरे यार की शादी है.
अरे इन बातों को बताते बताते मैं यह तो बताना ही भूल गया कि मुझे यह नहीं पता चल रहा है कि आज मैं इतना खुश क्‍यों हूं, और मेरे जेहन में जो खुशी उतरी वह किसका परिणाम था अगर आप मेरी इस पोस्‍ट से समझ पाएं तो क़पया कर इसे बताने का जरूर कष्‍ट करें. साथ ही अपनी शुभकामनाएं इस पोस्‍ट पर कामेंट करके या चेटबॉक्‍स में डाले.

Comments

Unknown said…
ABHI BELEIVE KARO AAJ KE ZAMANE MAIN BHI PYAR KARNE WALE HOTE HAI,,, AB MILNE BHAR KE DER HOTE HAI,,, AUR JAB WOH AAPKO MIL JAYE TOH BAS SAB KUCH POSSIBLE HO JATA HAI,,,,
BILKUL PYAR AAJ BHI JINDA HAI.
Udan Tashtari said…
लो जी शुभकामनाऐं.

Popular posts from this blog

क्‍या अदाकारी है, आप भी देंखे

आज सुबह मेरे मेल पर मेर‍े एक दोस्‍त ने एक तस्‍वीर भेजी, जो आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूं, यह तस्‍वीर उन्‍होंने खुद बनाई है. आप सभी देखने वाले से निवेदन है कि आप इस तस्‍वीर पर अपनी टिप्‍पणी जरूर भेंजे इससे उस कलाकार का हौंसला बढेगा. धन्‍यवाद

हमसे कुछ नहीं होगा हम गुलाम पत्रकार हैं

अभिषेक पोद्दार हमेशा की तरह कल रात अपने अखबार के कार्यालय से काम निपटाकर अपने घर गया, जहां हम सभी रूममेट बैठकर रोज की तरह किसी मुद्दे पर बहस कर रहे थे, अचानक मैंने अपने एक साथी से पूछा यार फ्रीलांस रिपोर्टर को हिंदी में क्‍या कहेंगे उसने कहां स्‍वतंत्र पत्रकार, तभी तपाक से मेरे मुंह से निकल गया तो हम गुलाम पत्रकार हैं. उसने भी भरे मन से हामी भर दी. फिर क्‍या था हमसब इसी मुद्दे पर चर्चा करने लगे. दो दिनों पहले बोलहल्‍ला पर पत्रकारिता के बारे में मैंने जो भडास निकाली थी उसका कारण समझ में आने लगा. आज हकीकत तो यह है कि हम जिस मीडिया घराने से जुड जाते हैं उसके लिए एक गुलाम की भांति काम करने लगते हैं, हम अपनी सोच, अपने विचार और अपनी जिम्‍मेवारियों को उस मीडिया घराने के पास गिरवी रख देते हैं और सामने वाला व्‍यक्ति हमें रोबोट की तरह इस्‍तेमाल करने लगता है, हम उसकी धुन पर कठपुतलियों की तरह नाचना शुरू कर देते हैं. किसी को जलकर मरते देखकर हमारा दिल नहीं पसीजता, किसी की समस्‍याओं में हमें अपनी टॉप स्‍टोरी व ब्रे‍किंग न्‍यूज नजर आती है, सच कहें तो शायद हमारी संवेदना ही मर चुकी हैं. शायद आज पूरी की...

फिर फंसी मेरठ में दूसरी गुडिया

चौदह साल के बाद लौट आने वाले आबिद की अपनी बीवी शबाना को पाने की जद्दोजहद अब दोनों पक्षों की पंचायतों में उलझ गई है। जहां कुलंजन गांव की पंचायत इस मामले को लेकर पूरी तरह आबिद के पक्ष में खड़ी है, वहीं लावड़ की पंचायत ने ऐलान कर दिया है कि शबाना को किसी भी हाल में आबिद को नहीं सौंपा जाएगा। इस मामले में एक गंभीर मोड़ आबिद की सास अकबरी के हालिया बयान के बाद आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आबिद ने शबाना का न केवल शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया बल्कि उसे गलत धंधे में भी धकेलने की कोशिश की। अकबरी का कहना है कि आबिद के ज़ुल्म से तंग आकर शबाना अपने बच्चे को लेकर मायके आ गई थी लेकिन आबिद उसके पीछे पीछे चला आया और उसने गांव के लोगों के सामने ही शबाना को पीटा। गांव वालों के विरोध करने पर आबिद ने शबाना को तलाक दे दिया। इसके बाद कई सालों के लिए वह गायब हो गया। अकबरी ने कहा कि चूंकि आबिद शबाना को तलाक देने के बाद लापता हुआ था इसलिए इद्दत की रस्म के बाद छह साल पहले शबाना का निकाह मुज़फ्फरपुर के खालापार निवासी अबरार से कर दिया गया। आबिद के लौट आने के बाद अकबरी के गांव की पंचायत में शबाना के दूसरे ...