Skip to main content

झारखंड में ऐसा ही होता है

नरेगा में अनियमितता की आवाज उठाने वाले ज्‍याद्रेंज पर ही उठा दी उंगली

गोविंद बल्‍लभ पंथ सामाजिक विज्ञान संस्‍थान में विजिटिंग प्रोफेसर व देश, दुनिया में बतौर जुझारू व सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में विख्‍यात ज्‍याद्रेंज ने पलामू जिलातंर्गत छत्‍तरपुर अनुमंडल प्रखंड में नरेगा में चल रही योजनाओं का सर्वेक्षण किया था. यहां के एक सामाजिक कार्यकर्ता ललित उरांव के हाथ नरेगा में अनियमि‍तता से संबंधित कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्‍य हाथ लग गये और इसी बीच ललित की हत्‍या कर दी जाती है. ललित मेहता ज्‍याद्रेंज की टीम के सहयोगी थे जो छत्‍तरपुर प्रखंड में नरेगा से संबंधित घोटाले की सीडी बनाई थी. तभी से नरेगा के घोटालेबाज ललित मेहता के पीछे पड गये और मौका देखकर उसकी हत्‍या कर दी. इस हत्‍या को ज्‍याद्रेंज ने काफी गंभीरता से लिया है इसकी गूंज केंद्र तक पहुंचाई. केंद्र ने इस हत्‍या को काफी गंभीरता से लिया और तभी से जिला प्रशासन इस मामले को हल्‍का करने में लग गया और राज्‍य सरकार को वैसी रिपोर्ट सौंप दी गई जो गले के नीचे नहीं उतरा. पलामू जिला प्रशासन द्वारा भेजी रिपोर्ट को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है. आइए एक नजर डालते हैं उस रिपोर्ट पर जिला प्रशासन ने लिखा है कि ज्‍याद्रेंज व उनकी टीम ने राजनीतिक दल की तरह तथाकथित जनसुनवाई के दिन भीड जुटाई. राजनीतिक पार्टियों की तरह ज्‍याद्रेंज ने 20-25 वाहनों का प्रयोग किया और ऐसा वातावरण तैयार किया कि मानो पूरे झारखंड में अनियमितता है. मंच पर कर्मचारियों-पदाधिकारियों को प्रताडित किया गया. उनके मनोबल को तोड दिया गया. प्रशासन ने यह भी कहा है कि गरीबों को भीड का प्रलोभन देकर लाया गया था. प्रशासन की रिपोर्ट में कहा गया है कि सकारात्‍मक कार्य पर ध्‍यान नहीं दिया गया है. जिला प्रशासन की पूरी रिपोर्ट को केंद्र सरकार द्वारा खारिज करने के बाद रांची से प्रकाशित एक दैनिक ने पूरी रिपोर्ट को छाप कर पूरे राज्‍य में एक बहस का मुद्दा छेड दिया है, जबकि सच्‍चाई है कि उक्‍त जनसुनवाई के दिन जिले के पत्रकार भी मौजूद थे और मंच पर कर्मचारियों व अधिकारियों को प्रताडित करने जैसी कोई घटना नहीं घटित हुई थी. ज्ञात हो कि उक्‍त जनसुनवाई के दिन इलाके में चल रही नरेगा योजनाओं की समीक्षा के बाद नरेगा में कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आई थी. लोगों से पैसा लेकर नरेगा का जॉब कार्ड बनाने, मास्‍टर रौल में भरपूर अनियमितता बरतने, फर्जी हस्‍ताक्षर कर पैसा निकालने संबंधित कई तरह की अनियमितताएं प्रकाश में आयी. इस जनसुनवाई कार्यक्रम में केंद्रीय रोजगार गांरटी परषिद के सदस्‍य एनी राजा, झारखंड सरकार के नरेगा उपायुक्‍त अमिताभ कौशल, पलामू डीसी नागेंद्र प्रसाद सिंह, पलामू एसपी दीपक कुमार वर्मा, छत्‍तरपुर एसडीओ रविंद्र कुमार, छतरपुर व चैनपुर बीडीओ, ज्‍याद्रेंज सहित नयी दिल्‍ली से कई एक्‍टीविस्‍ट, रांची व नयी दिल्‍ली से कई नामी गिरामी पत्रकार उपस्थित थे.

Comments

Popular posts from this blog

क्‍या अदाकारी है, आप भी देंखे

आज सुबह मेरे मेल पर मेर‍े एक दोस्‍त ने एक तस्‍वीर भेजी, जो आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूं, यह तस्‍वीर उन्‍होंने खुद बनाई है. आप सभी देखने वाले से निवेदन है कि आप इस तस्‍वीर पर अपनी टिप्‍पणी जरूर भेंजे इससे उस कलाकार का हौंसला बढेगा. धन्‍यवाद

हमसे कुछ नहीं होगा हम गुलाम पत्रकार हैं

अभिषेक पोद्दार हमेशा की तरह कल रात अपने अखबार के कार्यालय से काम निपटाकर अपने घर गया, जहां हम सभी रूममेट बैठकर रोज की तरह किसी मुद्दे पर बहस कर रहे थे, अचानक मैंने अपने एक साथी से पूछा यार फ्रीलांस रिपोर्टर को हिंदी में क्‍या कहेंगे उसने कहां स्‍वतंत्र पत्रकार, तभी तपाक से मेरे मुंह से निकल गया तो हम गुलाम पत्रकार हैं. उसने भी भरे मन से हामी भर दी. फिर क्‍या था हमसब इसी मुद्दे पर चर्चा करने लगे. दो दिनों पहले बोलहल्‍ला पर पत्रकारिता के बारे में मैंने जो भडास निकाली थी उसका कारण समझ में आने लगा. आज हकीकत तो यह है कि हम जिस मीडिया घराने से जुड जाते हैं उसके लिए एक गुलाम की भांति काम करने लगते हैं, हम अपनी सोच, अपने विचार और अपनी जिम्‍मेवारियों को उस मीडिया घराने के पास गिरवी रख देते हैं और सामने वाला व्‍यक्ति हमें रोबोट की तरह इस्‍तेमाल करने लगता है, हम उसकी धुन पर कठपुतलियों की तरह नाचना शुरू कर देते हैं. किसी को जलकर मरते देखकर हमारा दिल नहीं पसीजता, किसी की समस्‍याओं में हमें अपनी टॉप स्‍टोरी व ब्रे‍किंग न्‍यूज नजर आती है, सच कहें तो शायद हमारी संवेदना ही मर चुकी हैं. शायद आज पूरी की...

फिर फंसी मेरठ में दूसरी गुडिया

चौदह साल के बाद लौट आने वाले आबिद की अपनी बीवी शबाना को पाने की जद्दोजहद अब दोनों पक्षों की पंचायतों में उलझ गई है। जहां कुलंजन गांव की पंचायत इस मामले को लेकर पूरी तरह आबिद के पक्ष में खड़ी है, वहीं लावड़ की पंचायत ने ऐलान कर दिया है कि शबाना को किसी भी हाल में आबिद को नहीं सौंपा जाएगा। इस मामले में एक गंभीर मोड़ आबिद की सास अकबरी के हालिया बयान के बाद आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि आबिद ने शबाना का न केवल शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया बल्कि उसे गलत धंधे में भी धकेलने की कोशिश की। अकबरी का कहना है कि आबिद के ज़ुल्म से तंग आकर शबाना अपने बच्चे को लेकर मायके आ गई थी लेकिन आबिद उसके पीछे पीछे चला आया और उसने गांव के लोगों के सामने ही शबाना को पीटा। गांव वालों के विरोध करने पर आबिद ने शबाना को तलाक दे दिया। इसके बाद कई सालों के लिए वह गायब हो गया। अकबरी ने कहा कि चूंकि आबिद शबाना को तलाक देने के बाद लापता हुआ था इसलिए इद्दत की रस्म के बाद छह साल पहले शबाना का निकाह मुज़फ्फरपुर के खालापार निवासी अबरार से कर दिया गया। आबिद के लौट आने के बाद अकबरी के गांव की पंचायत में शबाना के दूसरे ...