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जिसका कोई नही होता उसका तो ...

अभिषेक आदित्य

जिसका कोई नही होता उसका तो खुदा है यारो, में नही कहता किताबो में लिखा है यारो फिल्म लावारिस का यह गीत झारखण्ड के अनाथ बच्चो पर सटीक बैठती है। यहाँ के अनाथ बच्चो के भरण पोषण करने की कोई उचित व्यवस्था नही है, ऐसे बच्चे भगवान भरोसे जी रहे है और और अंत में देखभाल के अभाव में ही भगवान कि शरण में जा रहे है कहने का मतलब मर रहे है। वही गाने की दूसरी पक्ति की तरफ सरकार ने अनाथ बच्चो को गौद लेने या देने के लिए एक कानून बना दिया है। पर इस कानून का अनुपालन कराने में राज्य सरकार पूरी तरह से विफल साबित हो रही है खासकर संथाल परगना में इसकी स्थिति और भी बदतर है क्योकि दतक ग्रहण कानून के अंतर्गत जो संस्थाये काम करेगी उनके लिए लाइसेंस का होना जरुरी है। इस दिशा में सरकार ने संथाल परगना छेत्र में किसी भी संस्था को लाइसेंस प्रदान नही किया है। जिस कारण ऐसे अनाथ बच्चो का रख रखाव नही हो पा रहा है। प्राय अनाथ बच्चे सडको पर मिलते है। ऐसे बच्चो के लालन पालन की जरुरत है जिसका खुलेआम उल्लघन हो रहा है। यह एक प्रकार से मानवाधिकार का उल्लघन है। आकरे बताते है कि झारखण्ड में शिशुओ की स्थिति ठीक नही है। आबादी के कुल तीन प्रतिशत जन्म के ६ माह के अन्दर ही मर जाते है। इतना ही नही दस प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार होते है। इनमे से वैसे भी शिशु है जो जन्म लेने के पहले ही गर्भ में ही मर जाते है और कुछ तो ऐसे है कि शिशुओ के जन्म के बाद माँ की मौत हो जाती है। ऐसे बच्चो की देखभाल करने वाला कोई नही है। इन शिशुओ को जीने का अधिकार है। वही झारखण्ड सरकार की उदासीनता के कारण संस्थाओ को सरकार की और से लाइसेंस नही दिया जा रहा है। कहा जाता है बच्चे ही देश का भविष्य है जब इन बच्चो का बचपन ऐसा है तब यह बच्चे बडे होकर क्या करेंगे और देश का भविष्य कैसा होगा इसका अंदाजा आप खुद ही लगा सकते है।

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